वीणा वादिनी

मा के झनन-झनन कर वीणा
सुर अनुरागिनी वीणा-वादिनी
दात्री सिद्धि नवीन ||
रजित शवेत कमल दल ऊपर
शवेत बसन शवेतांगी
शवेत प्रकाश विकास करी मा
हमहुँ शवेत वर मांगी
निर्मल ज्ञान पाबि निर्मलमन
रही सतत पद-लीना ||
मा के…..

ज्ञानागार सार संसारक
अंधकार बिच चंदा
सरस्वती-पद-विमुख अंध अछि
पडि अज्ञानक फन्दा
कृपापात्र-अंतर आलोकित
विद्या-बुद्धि प्रवीण ||
मा के…..

शेष गणेश महेश करथि
गुणगान अहांकेर माता
देल अहींकेर ज्ञानक बल पर
ब्रह्मा-विष्णु विधाता
सदय शारदे होउ ‘चन्द्रमणि’
हम बालक मतिहीना ||
मा के…..

-चन्द्रमणि

Published in: on April 30, 2011 at 7:20 pm  Leave a Comment  

गणेश वन्दना

गजबदन गणेश
माता श्री पार्वती पिताश्री महेश ||

काया विशाल भाल शोभित श्री चन्दन
दीव्य रूप अति अनूप गिरिजाके नन्दन
सिंदुरं सुवेश ||
माता श्री…….

कमल-हस्त मधुर मस्त मूसक सवारी
जगतक दुलारू सदैव शुभकारी
दाता दवेश ||
माता श्री…….

ओम केर प्रदक्षिणा सँ प्रथमपूज्य भेलौं
भक्त केर कष्टहरण हेतु शस्त्र लेलौं
जागु विघ्नेश ||
माता श्री…….

ज्ञानधाम देव अहाँ ज्ञानदान करियौ
तमोभूत ‘चन्द्रमणि’ तम विकार हरियौ
कविगुरु करुणेश ||
माता श्री…….

-चन्द्रमणि

Published in: on April 30, 2011 at 6:53 pm  Leave a Comment  

समर्पण

ई पुष्प जोगओल तनिका ले’
जे काज करथि मा मिथिला ले’ |
मैथिली फिल्म निर्माण करथि
नहि हानि लाभ केर ध्यान करथि ||
निज भाषा पर गउरव जनिका
गीतक अम्बुज देबनि तनिका ||

-चन्द्रमणि

Published in: on April 30, 2011 at 6:27 pm  Leave a Comment